स्टूडियो गेनैक्स का एनिमेशन तकनीक — वस्तुएं लचकदार तरीके से उछलती हैं, प्रभाव पर विकृत होती हैं, फिर वापस आती हैं।
अगर आप 1980 और 90 के दशक के स्टूडियो गेनैक्स (Gainax) के एनीमे देखते हैं, तो आपको तुरंत कुछ खास नज़र आएगा: हरकतें अलग लगती हैं। क्लासिक लिमिटेड एनीमेशन से ज़्यादा कड़क नहीं, पर ज़्यादा यथार्थवादी भी नहीं। इसके बजाय, हर चीज़ में एक तरह की उछाल भरी जान आ जाती है—चरित्र रबर की तरह उछलते हैं, उनके शरीर एक या दो फ्रेम के लिए विकृत हो जाते हैं, इससे पहले कि वे वापस उछलें। यह गेनैक्स इफ़ेक्ट (Gainax Effect) है, और यह संयोग से ज़्यादा एक सचेत डिज़ाइन निर्णय था।
यह तकनीक इस तरह काम करती है: एक हरकत को रैखिक (linear) या कोमल ईज़-इन/ईज़-आउट (ease-in/ease-out) के साथ एनिमेट करने के बजाय, एनिमेटर टक्कर या दिशा बदलने के बाद एक छोटी लोचदार विकृति (elastic deformation) डालता है। एक चरित्र ज़मीन पर कूदता है—बस उतरने के बजाय, उसका शरीर दो-तीन फ्रेम के लिए दब जाता है, फिर वह फिर से ऊपर की ओर उछलता है। एक मुक्का लगता है—लक्ष्य एक छोटे से पल के लिए विकृत हो जाता है। यह ओवरशूट-और-रिटर्न मूवमेंट (Overshoot-and-Return Movement) ज़्यादा जीवंत लगता है, लगभग कार्टून जैसा, लेकिन दृश्यों को हास्यास्पद बनाने के बजाय ऊर्जा देता है। सेट पर हम इसे कभी-कभी "बाउंस-थ्रू" (Bounce-Through) कहते हैं: एनिमेटर कठोर मुद्रा को "बाउंस-थ्रू" करता है। संपादन (editing) में, आप इसे तुरंत पहचान लेंगे क्योंकि हरकतें एक मुद्रा में समाप्त नहीं होतीं, बल्कि कई बार लहराती हैं।
गेनैक्स ने इसे क्यों विकसित किया? लिमिटेड एनीमेशन के लिए कम फ्रेम की ज़रूरत थी—लेकिन जीवन के बिना यह मृत लगता है। उछाल ने इस समस्या को हल किया: न्यूनतम अतिरिक्त ड्रॉइंग के साथ अधिकतम अभिव्यक्ति। आप इसे हिडेकी अन्नो (Hideaki Anno) के नियॉन जेनेसिस इवेंजेलियन (Neon Genesis Evangelion) या शुरुआती टेंजेन टोप्पा गुरेन लगान (Tengen Toppa Gurren Lagann) दृश्यों के काम में जानते हैं। आधुनिक स्टूडियो ने भी इसे अपनाया है—हमेशा गेनैक्स जितना चरम नहीं, लेकिन डीएनए (DNA) वहीं है।
डिजिटल 3डी एनीमेशन (digital 3D animation) में, इसे कीफ्रेम ईज़िंग (keyframe easing) और स्प्लाइन कर्व्स (spline curves) के माध्यम से अनुकरण (emulate) किया जा सकता है। आपके मोशन ग्राफ़िक टूल (motion graphic tool) में सही ओवरशूट वैल्यू (Overshoot Value) (आमतौर पर 1.1 से 1.5) वही प्रभाव पैदा करता है। समस्या: बहुत ज़्यादा मूर्खतापूर्ण लगता है, बहुत कम अप्रभावी। यह "जीवंत" और "विश्वसनीय" के बीच एक संतुलन है—और इसे खोजने में अनुभव लगता है। सेट पर असली अभिनेताओं के साथ यह स्वाभाविक रूप से काम नहीं करता है, लेकिन जब आप मोशन-कैप्चर डेटा (motion-capture data) को पोस्ट-प्रोसेस (post-process) करते हैं, तो आप इस लोचदार चरित्र को कर्व्स में लिख सकते हैं।
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क्विज़
1. Was beschreibt „Gainax-Effekt" am besten?
2. Zu welchem Department gehört „Gainax-Effekt"?