ट्वीटर और वूफर के लिए अलग पावर सप्लाई — क्रॉसटॉक कम करता है। डबिंग स्टूडियो में मानक।
डबिंग-स्टेज पर, उच्च-आवृत्ति (high-frequency) और निम्न-आवृत्ति (low-frequency) क्षेत्रों के बिजली की आपूर्ति को अलग किया जाता है - यह केवल पुरानी परंपरा के कारण नहीं है, बल्कि इसलिए कि प्रत्येक आवृत्ति रेंज की बिजली स्थिरता और प्रतिबाधा (impedance) व्यवहार के लिए पूरी तरह से अलग आवश्यकताएं होती हैं। एक निम्न-आवृत्ति स्पीकर बिजली को झटके में खींचता है, खासकर विस्फोटों या ऑर्केस्ट्रा के हिस्सों के दौरान। एक उच्च-आवृत्ति स्पीकर को स्पष्टता के लिए सटीक, तेज वोल्टेज विनियमन की आवश्यकता होती है। यदि दोनों एक ही एम्पलीफायर से चलते हैं, तो बास बिजली की रेल को मॉड्युलेट करता है और उच्च-आवृत्ति मद्धम हो जाती है - विशेष रूप से सिबिलेंट (sibilants) और परिवेशी ध्वनि (surround sound) के नियंत्रण में महत्वपूर्ण है।
व्यावहारिक कार्यान्वयन: दो अलग-अलग पावर एम्पलीफायर, या - आधुनिक डिजिटल सिस्टम में - दो डीएसपी (DSP) चैनल स्वतंत्र बिजली आपूर्ति के साथ। प्रोसेसर में एईएस/ईबीयू (AES/EBU) फीड को उच्च-पास (high-pass) और निम्न-पास (low-pass) श्रृंखलाओं में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक क्षेत्र को अपने स्वयं के पावर एम्पलीफायर के साथ स्वतंत्र ट्रांसफार्मर-सेकेंडरी वाइंडिंग (transformer-secondary winding) मिलती है, आदर्श रूप से अलग-अलग बिजली सर्किट से। यह जटिल लगता है, लेकिन यह किसी भी डब-स्टेज पर मानक है जो अपने नाम के लायक है - और यही कारण है कि वहां से लिए गए मिश्रण सिस्टम पर कठोर लग सकते हैं।
डबिंग में, बाय-वायरिंग (Bi-Wiring) ध्वनिक माप (acoustic measurement) के लिए भी एक शर्त है: जब आप आरटीए (RTA) या इम्पल्स-रेस्पॉन्स टूल्स (Impulse-Response Tools) के साथ काम करते हैं, तो आप उच्च-आवृत्ति और निम्न-आवृत्ति को स्वतंत्र रूप से समायोजित कर सकते हैं, बिना एक क्षेत्र की चरण समस्याओं (phase problems) या ओवरलोडिंग प्रभावों (overloading effects) के दूसरे को नुकसान पहुंचाए। यह कमरे के अनुकूलन (room optimization) में घंटों बचाता है। कुछ स्टेज इससे भी आगे जाते हैं - अलग सबवूफर, मिड-रेंज (mid-range) और प्रेजेंस बैंड (presence band) के लिए ट्राई- या क्वाड-एम्पिंग (Tri- or Quad-Amping) - लेकिन यह अत्यधिक आवश्यकताओं वाले सिनेमा के लिए एक विशेष मामला है।
चेतावनी: बाय-वायरिंग (Bi-Wiring) के लिए साफ क्रॉसओवर डिजाइन (crossover design) और रास्तों के बीच सटीक चरण संरेखण (phase alignment) की आवश्यकता होती है। अलग-अलग एम्पलीफायरों के साथ एक गलत कैलिब्रेटेड सिस्टम एक साधारण सिंगल-एम्प सेटअप से भी बदतर लगता है। इसलिए, इसे हमेशा ध्वनि इंजीनियर (Tonmeister) द्वारा मापने वाले माइक्रोफ़ोन (measuring microphone) और चरण विश्लेषक (phase analyzer) के साथ सत्यापित किया जाता है - केवल सुनकर नहीं।
संबंधित शब्द
क्विज़
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