तकनीकी विवरण
शास्त्रीय पेरिपेटिया (Peripetia) 3-7 मिनट तक चलने वाले एक अनुक्रम में प्रकट होती है, जिसे तीन संरचनात्मक घटकों द्वारा परिभाषित किया जाता है: एनाग्नोरिसिस (Anagnorisis - पहचान), हैमार्टिया-समाधान (Hamartia-Auflösung - दुखद दोष का निवारण), और कैटास्ट्रोफी/कैथार्सिस (Katastrophe/Katharsis - भावनात्मक मोड़)। तीन-अंक संरचना में, यह अंक II से अंक III के संक्रमण पर ठीक स्थित होती है, जबकि पांच-अंक योजना में यह चौथे अंक पर हावी होती है। आधुनिक पटकथा सिद्धांत "वास्तविक पेरिपेटिया" (भाग्य का पूर्ण उलटफेर) और "झूठी पेरिपेटिया" (स्थायी परिणामों के बिना अस्थायी मोड़) के बीच अंतर करते हैं।
इतिहास और विकास
अरस्तू ने 335 ईसा पूर्व में अपनी "काव्यशास्त्र" (Poetik) में पेरिपेटिया को त्रासदी के एक अनिवार्य तत्व के रूप में परिभाषित किया। डी.डब्ल्यू. ग्रिफ़िथ ने 1915 में "द बर्थ ऑफ ए नेशन" (The Birth of a Nation) में पहली बार सचेत रूप से अरिस्टोटेलियन नाटक को फिल्म में स्थानांतरित किया। बिली वाइल्डर ने 1944 से "डबल इंडेमनिटी" (Double Indemnity) जैसी फिल्मों में सिनेमाई पेरिपेटिया को पूर्ण किया, जहाँ उन्होंने इसे 107 मिनट की अवधि में ठीक 97वें मिनट में रखा। रॉबर्ट मैककी ने 1997 में "स्टोरी" (Story) में पटकथा लेखकों के लिए आधुनिक पेरिपेटिया सिद्धांत को व्यवस्थित किया और इसके इष्टतम स्थान के लिए 75-85% नियम स्थापित किया।
फिल्म में व्यावहारिक उपयोग
1999 की "द सिक्स्थ सेंस" (The Sixth Sense) में, 107 मिनट की अवधि में 97वें मिनट पर पेरिपेटिया होती है, जब मैल्कम को अपनी मृत्यु का एहसास होता है। "कैसाब्लांका" (Casablanca) (1942) में, रिक्की द्वारा इल्सा और विक्टर को ट्रांजिट कागजात सौंपने पर, अवधि के ठीक 78% पर मोड़ आता है। हिचकॉक ने 1958 की "वर्टिगो" (Vertigo) में एक दोहरे पेरिपेटिया का उपयोग किया: पहला मोड़ 65% पर (जूडी की असली पहचान), अंतिम पेरिपेटिया 95% पर (स्कॉट को हेरफेर का एहसास)। पेरिपेटिया के लिए पहले 30 मिनट में "प्लांट्स" (संकेत) और अंतिम अंक में "पेऑफ्स" (समाधान) द्वारा सटीक तैयारी की आवश्यकता होती है।
तुलना और विकल्प
पेरिपेटिया अपने भावनात्मक गहराई और परिणामों की अपरिवर्तनीयता के कारण प्लॉट पॉइंट (Plot Point) से भिन्न होती है। जबकि मिडपॉइंट (Midpoint) अवधि के 50% पर नई जानकारी प्रदान करता है, पेरिपेटिया पिछली घटनाओं के पूरे अर्थ को बदल देती है। आधुनिक "थर्ड एक्ट ट्विस्ट" (Third Act Twist) अक्सर वास्तविक भाग्य उलटफेर के बिना एक कमजोर पेरिपेटिया होता है। सीरियलाइज्ड प्रारूप (Serialized Formats) प्रत्येक एपिसोड के अंत में "मिनी-पेरिपेटिया" (Mini-Peripetien) का उपयोग करते हैं, लेकिन शायद ही कभी शास्त्रीय रूप की परिवर्तनकारी शक्ति तक पहुँचते हैं। गैर-रैखिक कथाओं (Non-linearen Narrativen) में, "रिविलेशन सीक्वेंस" (Revelation Sequence) अक्सर पारंपरिक पेरिपेटिया की जगह लेता है।