तकनीकी विवरण
पेशेवर वाला (Walla) रिकॉर्डिंग आमतौर पर 6-12 वक्ताओं के साथ ध्वनि-रोधक स्टूडियो में 48 kHz/24 बिट पर की जाती है। मुख्य संवाद की तुलना में ध्वनि स्तर -40 dB और -25 dB के बीच होता है। वाला समूह (Walla-Groups) आमतौर पर तीन परतों में काम करते हैं: अग्रभूमि (3-4 वक्ता), मध्यभूमि (2-3 वक्ता) और पृष्ठभूमि (1-2 वक्ता)। प्रो टूल्स (Pro Tools) जैसे आधुनिक DAWs, 7.1-सराउंड पोजिशनिंग तक स्थानिक वाला (spatial Walla) प्रोसेसिंग के लिए क्रोटोस रिफॉर्मर प्रो (Krotos Reformer Pro) या ऑडियोईज़ स्पीकरफोन (AudioEase Speakerphone) जैसे विशेष प्लग-इन्स का उपयोग करते हैं।
इतिहास और विकास
1931 में आरकेओ स्टूडियो (RKO Studios) ने "सिमरॉन" (Cimarron) के लिए पहली बार व्यवस्थित वाला (Walla) रिकॉर्डिंग पेश की। वार्नर ब्रदर्स (Warner Bros.) ने 1935 में निश्चित वक्ता समूहों के साथ पहले पेशेवर वाला समूहों (Walla-Groups) की स्थापना की। 1950 के दशक से, विशेष लूप समूह (Loop Groups) विकसित हुए - 8-15 अभिनेताओं की टीमें जो चित्र के साथ लाइव पृष्ठभूमि शोर और वाला (Walla) को सिंक्रनाइज़ करती हैं। 1990 के दशक से, फेयरलाइट (Fairlight) जैसी डिजिटल प्रणालियों ने चर पिच और गति के साथ वाला (Walla) पटरियों के वास्तविक समय हेरफेर को सक्षम किया है।
फिल्मों में व्यावहारिक उपयोग
2000 की फिल्म "ग्लेडिएटर" (Gladiator) में, साउंड डिजाइनर स्कॉट मिलन (Scott Milan) ने कोलोसियम (Colosseum) दृश्यों के लिए 40 अलग-अलग वाला (Walla) पटरियों को 50,000 आभासी दर्शकों तक के साथ जोड़ा। "द डार्क नाइट" (The Dark Knight) (2008) ने न्यूयॉर्क की बोली के रंग के साथ विशेष रूप से रिकॉर्ड किए गए गोथम वाला (Gotham Walla) का उपयोग किया। "1917" (2019) जैसी आधुनिक प्रोडक्शन प्रक्रियात्मक वाला (Procedural Walla) पर निर्भर करती है - एल्गोरिथम-जनित भीड़ शोर जो स्वचालित रूप से चित्र सामग्री और दृश्य मनोदशा के अनुकूल होते हैं। मानक वर्कफ़्लो में कच्ची रिकॉर्डिंग, EQ प्रोसेसिंग (-200 Hz हाई-पास), कम्प्रेशन (3:1 अनुपात) और अंतिम सराउंड पोजिशनिंग शामिल है।
तुलना और विकल्प
वाला (Walla), चिल्लाहट या तालियों के बजाय भाषण ध्वनियों पर ध्यान केंद्रित करके भीड़ के शोर (Crowd Noise) से भिन्न है। एडीआर वाला (ADR-Walla) स्टूडियो में बाद में रिकॉर्ड किया जाता है, जबकि प्रोडक्शन वाला (Production Walla) सीधे सेट पर उत्पन्न होता है, लेकिन माइक्रोफ़ोन की सीमाओं (-6 dB से -12 dB) के कारण अक्सर अनुपयोगी होता है। परिवेश पटरियों (Ambience Tracks) में व्यापक परिवेशी ध्वनियां होती हैं, जबकि वाला (Walla) विशेष रूप से मानव आवाजों पर केंद्रित होता है। 2021 से रेस्पीचर वॉयस मार्केटप्लेस (Respeecher Voice Marketplace) जैसी आधुनिक एआई प्रणालियां सिंथेटिक वाला (Walla) जनरेशन प्रदान करती हैं, लेकिन अभी तक पेशेवर लूप समूहों (Loop Groups) की जैविक गुणवत्ता तक नहीं पहुंची हैं।