कला स्थान में वीडियो कार्य — कई स्क्रीनें गतिशील अनुभव बनाती हैं, कहानी नहीं। दर्शक स्वयं चलता है।
कला स्थान (Kunstraum) में गतिमान चित्र (Bewegtbild) सिनेमा से अलग तरह से काम करता है। दर्शक एक ऐसे कमरे में प्रवेश करता है जहाँ कई मॉनिटर, प्रोजेक्शन या स्क्रीन एक साथ चल रहे होते हैं — न कोई शुरुआत, न कोई अंत, न बैठने की बेंचें। यही वीडियो इंस्टॉलेशन है: एक स्थानिक अनुभव, जहाँ आप दर्शक के रूप में कृति के बीच से गुजरते हैं, न कि कृति आपके सामने से गुजरती है। समय रैखिक रूप से नहीं चलता। आप अंदर आते हैं, बीच से एक क्षण देखते हैं, पाँच मिनट रुकते हैं, कमरे से बाहर निकल जाते हैं — और फिर भी आपने एक पूर्ण अनुभव प्राप्त कर लिया है।
तकनीकी रूप से इसका मतलब है: कई स्वतंत्र वीडियो लूप सिंक्रोनस या एसिंक्रोनस रूप से चलते हैं। एक इंस्टॉलेशन दो दीवारों से बन सकता है, जिन पर एक ही छवि प्रतिबिंबित होती है, या पाँच अलग-अलग स्क्रीनों से, जो एक-दूसरे के साथ संवाद करते हैं। संपादन — यहाँ स्थानिक असेंबली (räumliche Montage) के रूप में समझा जाता है — टाइमलाइन पर नहीं होता, बल्कि दर्शक के दिमाग में होता है, जो अपनी निगाहों को छवियों के बीच बदलता है। इसके लिए छायाकार (Kameramann) और डिजाइनर (Gestalter) को एक अलग दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है: संपादन की लय (Schnitt-Rhythmus) नहीं, बल्कि स्थान की लय (Raum-Rhythmus)। आपकी सेटिंग को तब भी काम करना चाहिए जब उसके बगल में या पीछे कुछ और चल रहा हो।
व्यवहार में इसका मतलब है: लंबे समय तक शूट करें। उन क्षणों को रोकें जो शास्त्रीय फिल्म में बहुत स्थिर होंगे। पाँच मिनट की वीडियो इंस्टॉलेशन में 90-90 सेकंड की तीन सेटिंग्स शामिल हो सकती हैं, जो दोहराई जाती हैं। लूप आपका नाटकीय उपकरण (dramaturgisches Werkzeug) है। ध्वनि का उपयोग कम या बिल्कुल न करें — या इसे एक स्वतंत्र स्थानिक कारक (Raum-Faktor) के रूप में उपयोग करें, जो छवियों के साथ ओवरलैप होता है। रंग और प्रकाश दृश्य कला (bildenden Kunst) की तरह संरचनात्मक साधनों (Kompositionsmittel) के रूप में कार्य करते हैं; शार्पनेस (Schärfe) और गति (Bewegung) कहानी के तर्क (Story-Logik) से कम जुड़े होते हैं, संवेदी प्रभाव (sensorischer Wirkung) से अधिक।
वीडियो इंस्टॉलेशन अक्सर सामग्री की कमी से उत्पन्न होते हैं: कथा (Narration) के लिए पर्याप्त बजट नहीं, संपादन के लिए पर्याप्त समय नहीं, छवि की गुणवत्ता (Bild-Qualität) के लिए पर्याप्त जगह नहीं। लेकिन यही उनकी ताकत है। वे आपको कथानक (Plot) के बजाय उपस्थिति (Präsenz) बनाने के लिए मजबूर करते हैं। स्वयं स्थान संपादन की सतह (Schnittfläche) बन जाता है।
संबंधित शब्द
क्विज़
1. Zu welchem Department gehört „Videoinstallation"?