Extended lab development measured in stops: compensates underexposure while raising grain and contrast — often used deliberately as a texture tool.
पुश-प्रोसेसिंग का मतलब है: फिल्म को लैब में मानक से अधिक समय तक विकसित किया जाता है, जिसे एपर्चर स्टॉप में मापा जाता है। एक-स्टॉप-पुश एक स्टॉप की अंडरएक्सपोजर की भरपाई करता है - 500T व्यावहारिक रूप से 1000 बन जाता है। कीमत: अधिक ग्रेन, अधिक कंट्रास्ट, थोड़े बदले हुए रंग। आज यह कीमत अक्सर पुश का कारण बनती है।
दो कारण
क्लासिक कारण मजबूरी है - बहुत कम रोशनी, बहुत धीमा स्टॉक। आज रचनात्मक कारण हावी है: जानबूझकर खुरदरी छवि। इसका विपरीत पुल-प्रोसेसिंग (कम विकसित करना) है: कम कंट्रास्ट, महीन ग्रेन, ओवरएक्सपोजर में बचाव।
व्यवहार में उपयोग
पुश प्रति रोल किया जाता है, प्रति दृश्य नहीं - निर्णय शूटिंग के समय तय हो जाता है और कैमरा रिपोर्ट के माध्यम से लैब में जाता है। सामान्य सीमा: +1/2 से +2 स्टॉप। +2 से छाया घनी हो जाती है और त्वचा के रंग कठोर हो जाते हैं। लैब प्रति रोल अतिरिक्त शुल्क के साथ पुश की गणना करते हैं।
व्यवहार से सुझाव
- पहले परीक्षण करें: एक ही दृश्य को सामान्य और पुश करके विकसित करवाएं - ग्रेन और कंट्रास्ट स्टॉक के आधार पर काफी अलग प्रतिक्रिया करते हैं (500T, 50D की तुलना में पुश को अधिक सहनशील है)।
- छाया के लिए एक्सपोज करें, बनावट के लिए पुश करें - पुश मूल एक्सपोजर की जगह नहीं लेता है, यह जो है उसे बढ़ाता है।
- कलरलिस्ट से जल्दी बात करें: पुश की गई सामग्री को अलग तरह से ग्रेड किया जाता है (घनी काली, जल्दी ढलती हुई हाइलाइट्स)।
- पुश रोल को कैमरा रिपोर्ट पर स्पष्ट रूप से चिह्नित करें - गलती से सामान्य रूप से विकसित किया गया पुश रोल एक स्टॉप बहुत गहरा होगा।
संबंधित शब्द
क्विज़
1. Was beschreibt „Push-Entwicklung" am besten?
2. Zu welchem Department gehört „Push-Entwicklung"?