तकनीकी विवरण
लो की (Low Key) में मुख्य रूप से 2000-5000 लक्स की की लाइट (Key Light) का उपयोग किया जाता है, जिसमें फिल लाइट (Fill Light) या तो बिल्कुल नहीं होती या बहुत कम (500 लक्स से नीचे) होती है, जिससे छाया वाले क्षेत्र 2% से कम परावर्तन (reflection) में होते हैं। बैक लाइट (Back Light) और प्रैक्टिकल लाइट सोर्स (practical light sources) चुनिंदा हाइलाइट्स (accents) बनाते हैं। हाई की (High Key) के लिए 3000-8000 लक्स की की लाइट, 2000-6000 लक्स की तीव्र फिल लाइट और छाया को खत्म करने के लिए अतिरिक्त बैकग्राउंड लाइटिंग (background lighting) की आवश्यकता होती है। हिस्टोग्राम (Histogram) लो की में मानों के निचले 30% में एकाग्रता दिखाता है, जबकि हाई की में 60-100% तक समान वितरण दिखाता है। आधुनिक एलईडी पैनल (LED panels) दोनों तकनीकों के लिए 2700K-6500K के बीच कलर टेम्परेचर (color temperature) के सटीक नियंत्रण की अनुमति देते हैं।
इतिहास और विकास
लो की का विकास 1940 के दशक के हॉलीवुड फिल्म नोयर (Film Noir) में हुआ, जो जर्मन एक्सप्रेशनिज़्म (German Expressionism) से प्रेरित था। ग्रेग टोलैंड (Gregg Toland) ने 1941 में "सिटिजन केन" (Citizen Kane) में डीप-फोकस फोटोग्राफी (Deep-Focus Photography) के साथ इस तकनीक को परिपूर्ण किया। हाई की 1930 के दशक की एमजीएम (MGM) की कॉमेडी और म्यूजिकल फिल्मों में समानांतर रूप से उभरा, जहाँ सिनेमैटोग्राफर विलियम एच. डेनियल्स (William H. Daniels) ने ग्रेटा गार्बो (Greta Garbo) की फिल्मों के लिए इस तकनीक को मानकीकृत किया। 1960 के दशक में स्वेन न्यक्विस्ट (Sven Nykvist) ने इंगमार बर्गमैन (Ingmar Bergman) के साथ प्राकृतिक खिड़की की रोशनी के माध्यम से हाई की में क्रांति ला दी। 2005 के बाद से डिजिटल सिनेमैटोग्राफी (digital cinematography) ने एच.डी.आर. मॉनिटरिंग (HDR monitoring) और लॉग रिकॉर्डिंग (Log recording) के माध्यम से दोनों तकनीकों का काफी विस्तार किया है।
फिल्मों में व्यावहारिक उपयोग
लो की थ्रिलर फिल्मों जैसे "से7ेन" (Se7en) (1995, डैरियस खोंडजी - Darius Khondji) में 90% दृश्यों के साथ 18% ग्रे रिफ्लेक्शन से नीचे, या "द डार्क नाइट" (The Dark Knight) (2008, वैली फ़िफ़्टर - Wally Pfister) में चुनिंदा एलईडी लाइटिंग के साथ हावी है। हाई की "हर" (Her) (2013, होयते वैन होयटेमा - Hoyte van Hoytema) जैसी कॉमेडी फिल्मों को 5600K डेलाइट बैलेंस (daylight balance) और 10% से कम गहराई वाली न्यूनतम छाया के साथ आकार देती है। लो की के वर्कफ़्लो (workflow) में लंबे सेटअप समय (45-90 मिनट प्रति सेटअप) और सटीक स्पॉट पोजिशनिंग (spot positioning) की आवश्यकता होती है। हाई की के लिए अधिक शक्ति (आमतौर पर 40-80kW कुल खपत) की आवश्यकता होती है, लेकिन टेक्स के बीच कम समायोजन समय लगता है।
तुलना और विकल्प
लो की सामान्य ओवरएक्सपोजर (underexposure) के बजाय लक्षित प्रकाश व्यवस्था (targeted lighting) से भिन्न होता है। हाई की ओवरएक्सपोजर (overexposure) के समान नहीं है, बल्कि नियंत्रित एकरूपता (controlled uniformity) है। प्राकृतिक प्रकाश व्यवस्था (Natural Lighting) एक आधुनिक विकल्प के रूप में न्यूनतम वृद्धि के साथ उपलब्ध प्रकाश का उपयोग करती है। रेम्ब्रांट लाइटिंग (Rembrandt Lighting) 45° कोण की स्थिति के साथ दोनों तकनीकों को जोड़ती है। एच.डी.आर. रिकॉर्डिंग (14+ स्टॉप डायनामिक रेंज) कुछ हद तक क्लासिक हाई की सेटअप की जगह लेती है, जबकि ओएलईडी डिस्प्ले (OLED displays) पिछले प्रोजेक्शन सिस्टम की तुलना में लो की विवरण को अधिक सटीक रूप से प्रस्तुत करते हैं।