तकनीकी विवरण
मानक लॉलीपॉप में 12", 18", 24" और 30" इंच (30-76 सेमी) व्यास वाली डिफ्यूजन डिस्क होती हैं। टेलीस्कोपिक आर्म आमतौर पर 60-180 सेमी तक बढ़ाई जा सकती है और 2 किलोग्राम तक का वजन उठा सकती है। डिफ्यूजन सामग्री ट्रांसमिशन में भिन्न होती है: 216 (1/4 डिफ्यूजन, 92% ट्रांसमिशन), 250 (1/2 डिफ्यूजन, 84% ट्रांसमिशन) से लेकर हेवी फ्रॉस्ट (65% ट्रांसमिशन) तक। उच्च-गुणवत्ता वाले मॉडल जैसे मैथ्यूज लॉलीपॉप 150°C तक गर्मी प्रतिरोधी सामग्री का उपयोग करते हैं और लॉकिंग के साथ 360° स्विवेल जॉइंट्स से लैस होते हैं।
इतिहास और विकास
मैथ्यूज स्टूडियो इक्विपमेंट ने 1987 में सेट पर अधिक मोबाइल डिफ्यूजन समाधानों की मांग के जवाब में पहला व्यावसायिक लॉलीपॉप विकसित किया। इससे पहले, सिनेमैटोग्राफर्स को डिफ्यूजन फ्रेम के लिए अलग-अलग तिपाई स्थापित करने पड़ते थे। लॉलीपॉप ने विशेष रूप से वृत्तचित्र और साक्षात्कार उत्पादन में छोटे प्रकाश सेटअप की दक्षता में क्रांति ला दी। 2000 के दशक के बाद से आधुनिक वेरिएंट में क्विक-रिलीज़ तंत्र और विनिमेय डिफ्यूजन डिग्री को एकीकृत किया गया है।
फिल्मों में व्यावहारिक उपयोग
रोजर डीकिंस ने "सिकारियो" (2015) में इनडोर दृश्यों के लिए लॉलीपॉप का व्यापक रूप से उपयोग किया, ताकि तंग जगहों पर अतिरिक्त तिपाई स्थापित किए बिना कठोर प्रैक्टिकल लाइट को नरम किया जा सके। साक्षात्कारों में, लॉलीपॉप को मानक रूप से 2K या एलईडी पैनल के सामने रखा जाता है ताकि आंखों में कैचलाइट्स बनाई जा सकें, बिना छाया को बढ़ाए। वृत्तचित्र निर्माता त्वरित प्रतिक्रिया की सराहना करते हैं: डिफ्यूज़र को 3-5 सेकंड में स्थित और समायोजित किया जा सकता है।
तुलना और विकल्प
स्थिर डिफ्यूजन फ्रेम या सॉफ्टबॉक्स के विपरीत, लॉलीपॉप कम डिफ्यूजन क्षेत्र के साथ अधिकतम गतिशीलता प्रदान करता है। अंतर्निहित डिफ्यूजन (किनो फ्लो सेलेब, एआरआरआई स्काईपैनल) वाले आधुनिक एलईडी पैनल तेजी से हार्ड सोर्स और लॉलीपॉप के संयोजन को बदल रहे हैं। बड़े क्षेत्रों के लिए सिल्क के साथ 4x4 फ्रेम बेहतर बने हुए हैं, जबकि लॉलीपॉप चेहरे की बिंदु-जैसी रोशनी और तंग जगहों के लिए बेजोड़ बने हुए हैं।