1950s–70s की Agfa रंग नेगेटिव फिल्म — तीव्र संतृप्ति, गर्म रंग, विशिष्ट अनाज। आजकल डिजिटल ग्रेडिंग में रेट्रो लुक के लिए।
डायकलर एग़्फ़ा (Agfa) के रंगीन फ़िल्मों के बेड़े का प्रमुख उत्पाद था — एक रंगीन नेगेटिव फ़िल्म जिसने 1950 के दशक से लेकर 1970 के दशक तक यूरोपीय निर्माणों पर अपना दबदबा कायम रखा। कोडक (Kodak) सामग्री से इसका मुख्य अंतर रंग विज्ञान में था: एग़्फ़ा (Agfa) ने एक अलग रंग युग्मन प्रणाली (color coupler system) के साथ काम किया, जिसने मैजेंटा (magenta) और लाल-नारंगी (red-orange) को काफी अधिक तीव्रता से पुन: प्रस्तुत किया, और साथ ही एक विशिष्ट पीला-हरा (yellow-green) गर्म रंगत (warm tint) लाया। यह कोई गलती नहीं है — यह एक पहचान है।
सेट पर आप डायकलर (Diacolor) को तुरंत रोशनी में पहचान लेते हैं। इमल्शन (emulsion) नीली और बैंगनी रोशनी को ईस्टमैनकलर (Eastmancolor) की तुलना में अलग तरह से "सोखता" है। त्वचा के रंग जल्दी से एक साबुन जैसा, थोड़ा पीलापन लिए हुए अतिरिक्त रंगत प्राप्त करते हैं, और हरे रंग पीले रंगत वाले लगते हैं। दानेदारपन (grain) अधिक स्पष्ट होता है, खासकर छाया में — अप्रिय नहीं, बल्कि एक महीन दानेदारपन की तरह जो पूरी तस्वीर को बनावट (texture) देता है। जिन्होंने उस समय डायकलर (Diacolor) का इस्तेमाल किया, उन्होंने इसे जानबूझकर किया: इसका लुक यूरोपीय, गर्म, विशिष्ट था। इसके मुकाबले कोडक (Kodak) की फ़िल्में चिकनी, ठंडी, तकनीकी लगती थीं।
आधुनिक ग्रेडिंग रूम (grading rooms) में, डायकलर (Diacolor) लंबे समय से रेट्रो लुक (retro look) के लिए एक मानक शैली बन गया है। कलरलिस्ट (colorists) ऐसे LUTs प्रोग्राम करते हैं जो इस विशिष्ट मैजेंटा (magenta) पर जोर, गर्म रंगत बदलाव (warm shift) और दानेदारपन (grain) का अनुकरण करते हैं — यह एक मानक है जब किसी निर्माण को "क्लासिक एग़्फ़ा (Agfa) अनुभव" की आवश्यकता होती है। यह काम करता है, क्योंकि डायकलर (Diacolor) का रंग पुनरुत्पादन (color reproduction) संयोगवश नहीं था, बल्कि एक सुसंगत प्रणाली थी: गर्मतर काले बिंदु (warmer black points), अधिक संतृप्त मध्य-टोन (saturated mid-tones), समकालीन कोडक (Kodak) स्टॉक की तुलना में कम कंट्रास्ट रेंज (contrast range)। जो लोग आज डायकलर (Diacolor) की अभिलेखीय सामग्री (archive material) को डिजिटाइज़ करते हैं, वे तुरंत इस हस्ताक्षर को पहचान लेते हैं — और यह खराब नहीं होता। दानेदारपन स्थिर है, और 70 साल बाद भी संतृप्ति (saturation) मौजूद लगती है।
आधुनिक परियोजनाओं के लिए जो जानबूझकर इस सौंदर्यशास्त्र (aesthetics) की ओर बढ़ना चाहते हैं — चाहे वह विज्ञापन (commercials), ऐतिहासिक नाटक (period dramas) हों या संगीत वीडियो (music videos) — डायकलर (Diacolor) की विशेषताओं का अध्ययन करना सार्थक है। इसका मतलब पुरानी फ़िल्म का उपयोग करना नहीं है। इसका मतलब है कि इस रंग विज्ञान की ज्यामिति (geometry) को समझना और इसे डिजिटल रूप से फिर से बनाना। वार्म-बैलेंस (warm-balance), मैजेंटा-बायस (magenta-bias), महीन दानेदार संरचना (fine grain structure), थोड़ा कम काला मान (reduced black value) — ये वे घटक हैं जिनसे युद्धोत्तर सिनेमा (post-war cinematography) का यूरोपीय लुक बनता है।
संबंधित शब्द
क्विज़
1. Was beschreibt „Diacolor" am besten?
2. Zu welchem Department gehört „Diacolor"?