काँच की सतहों पर अति-पतली कोटिंग — प्रतिबिंब कम करती है, कंट्रास्ट बढ़ाती है, फ्लेयर व्यवहार को प्रभावित करती है।
हर कांच की सतह लगभग 4% प्रकाश को परावर्तित करती है। बिना कोटिंग वाले 12 कांच तत्वों (24 सतहों) वाले लेंस में परावर्तन के कारण लगभग आधा प्रकाश नष्ट हो जाएगा। आधुनिक मल्टी-कोटिंग तकनीक इसे प्रति सतह 0.2% से कम कर देती है।
विंटेज बनाम आधुनिक
पुराने लेंस (1970 से पहले) में सिंगल-कोटिंग होती है या कोई कोटिंग नहीं होती है - वे अधिक फ्लेयर करते हैं, उनमें कंट्रास्ट कम होता है, लेकिन एक "गर्म" लुक होता है। मल्टी-कोटिंग वाले आधुनिक लेंस अधिक कंट्रास्ट वाले और फ्लेयर-प्रतिरोधी होते हैं, लेकिन वे क्लिनिकल लग सकते हैं।
डी-कोटिंग एक चलन के रूप में
कुछ निर्माता जानबूझकर आंशिक रूप से डी-कोटेड लेंस (जैसे, Tribe7 Blackwing7 "ट्यून्ड" संस्करण) पेश करते हैं, ताकि विंटेज चरित्र को आधुनिक यांत्रिकी के साथ जोड़ा जा सके।
संबंधित शब्द
क्विज़
1. Zu welchem Department gehört „Linsenvergütung (Coating)"?